पूर्वांचल के मऊ से लगातार पाँचवी बार विधायक चुने गए माफ़िया नेता मुख़्तार अंसारी की कहानी के ढेर सारे पन्ने हैं.
लेकिन उनकी कहानी पर आने से पहले यह जानिए कि 2017 में जमा किए गए उनके अपने चुनावी शपथपत्रों के अनुसार उन पर फ़िलहाल देश की अलग-अलग अदालतों में हत्या, हत्या के प्रयास, हथियारबंद तरीक़े से दंगे भड़काने, आपराधिक साज़िश रचने, आपराधिक धमकियाँ देने, सम्पत्ति हड़पने के लिए धोखाधड़ी करने, सरकारी काम में व्यावधान पहुंचाने से लेकर जानबूझकर चोट पहुंचाने तक के 16 केस हैं.
एक वक़्त में उन पर मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गनाइज्ड क्राइम ऐक्ट) और गैंगस्टर ऐक्ट के तहत 30 से ज़्यादा मुक़दमे दायर थे.
इनमें से कुछ अहम मामलों में अदालत ने सबूतों की कमी, गवाहों के पलट जाने और सरकारी वकील की कमज़ोर पैरवी के कारण इन्हें बरी कर दिया गया.
लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या समेत 16 गंभीर मामलों में इन पर अब भी मुक़दमे चल रहे हैं.
1996 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले मुख़्तार ने 2002, 2007, 2012 और फिर 2017 में भी मऊ से जीत हासिल की. इनमें से आख़िरी तीन चुनाव उन्होंने देश की अलग-अलग जेलों में बंद रहते हुए लड़े.
इस रिपोर्ट के सिलसिले में मैं पूर्वांचल में ग़ाज़ीपुर ज़िला स्थित मुख़्तार अंसारी के पैतृक निवास गई थी लेकिन आपको वहां का ब्यौरा बताने से पहले मुख़्तार की ज़िंदगी से जुड़े ये तीन ज़रूरी पन्ने :
अपराधी, अफ़ीम और आईएएस अफ़सर एक साथ पैदा करने वाला ग़ाज़ीपुर हमेशा से पूर्वांचल के गैंगवार की धुरी रहा है.
मुख़्तार अंसारी के राजनीतिक और आपराधिक समीकरणों में ग़ाज़ीपुर का महत्व बताते हुए वरिष्ठ पत्रकार उत्पल पाठक कहते हैं, "80 और 90 के दशक में अपने चरम पर रहा बृजेश सिंह और मुख़्तार का ऐतिहासिक गैंगवार यहीं ग़ाज़ीपुर से शुरू हुआ था.''
दोआब की उपजाऊ ज़मीन पर बसा ग़ाज़ीपुर ख़ास शहर है. राजनीतिक तौर पर देखें तो एक लाख से ज़्यादा भूमिहार जनसंख्या वाले ग़ाज़ीपुर को उत्तर प्रदेश में भूमिहारों के सबसे बड़े पॉकेट में से एक माना जाता है. यहां तक कि कुछ पुराने स्थानीय पत्रकार आम बोलचाल में ग़ाज़ीपुर को 'भूमिहारों का वैटिकन' भी कहते हैं.
देश के सबसे पिछड़े इलाक़ों में आने वाले ग़ाज़ीपुर में उद्योग के नाम पर यहां कुछ ख़ास नहीं है. अफ़ीम का काम होता है और हॉकी ख़ूब खेली जाती है. ग़ाज़ीपुर का एक महत्वपूर्ण विरोधाभास यह भी है कि अपराधियों और पूर्वांचल के गैंगवार की धुरी होने के साथ-साथ इस ज़िले से हर साल कई लड़के आईएएस-आईपीएस भी बनते हैं.
पाठक कहते हैं, "मुख़्तार अंसारी और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव ग़ाज़ीपुर से लेकर मऊ, जौनपुर, बलिया और बनारस तक है. सिर्फ़ 8-10 प्रतिशत मुसलमान आबादी वाले ग़ाज़ीपुर में हमेशा से अंसारी परिवार हिंदू वोट बैंक के आधार पर चुनाव जीतता रहा है".
ग़ाज़ीपुर के 'प्रथम राजनीतिक परिवार' के तौर पर पहचाना जाने वाले अंसारी परिवार इस ज़िले और इससे जुड़े अनेक विरोधाभासों के सिलसिले को जैसे आगे ही बढ़ाता ही है.
मसलन, पिछले तक़रीबन 15 सालों से जेल में बंद मुख़्तार अंसारी के दादा देश की आज़ादी के संघर्ष में गांधी जी का साथ देने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं और 1926-27 में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे डॉक्टर मुख़्तार अहमद अंसारी थे.
मुख़्तार अंसारी के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को 1947 की लड़ाई में शहादत के लिए महावीर चक्र से नवाज़ा गया था.
ग़ाज़ीपुर में साफ़-सुथरी छवि रखने वाले और कम्युनिस्ट बैकग्राउंड से आने वाले मुख़्तार के पिता सुभानउल्ला अंसारी स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में मुख़्तार अंसारी के चाचा हैं.
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